गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती ।नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।आज तीर्थराज प्रयागराज में, भारत की शाश्वत आध्यात्मिक विरासत और लोक आस्था के प्रतीक महाकुंभ में ध्यान करके स्वयं को कृतार्थ अनुभव कर रहा हूँ।









गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती ।नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।आज तीर्थराज प्रयागराज में, भारत की शाश्वत आध्यात्मिक विरासत और लोक आस्था के प्रतीक महाकुंभ में ध्यान करके स्वयं को कृतार्थ अनुभव कर रहा हूँ।








